समंदर में दुश्मनों के पसीने छुड़ाने आ गई भारत की पहली स्वदेशी 'ड्रोन बोट', बिना नाविक के मीलों दूर से कंट्रोल होने वाले इस हथियार से देश की नौसैन्य ताकत में हुआ ऐतिहासिक इजाफा
रक्षा तकनीकी के क्षेत्र में भारत ने एक और बड़ी छलांग लगाई है। भारत अब उन चुनिंदा देशों के विशेष समूह में शामिल हो गया है जिनके पास अनमैन्ड सरफेस वेसल (USV) यानी पानी पर चलने वाली 'ड्रोन बोट' बनाने की क्षमता है। सागर डिफेंस इंजीनियरिंग द्वारा इसे पूरी तरह स्वदेशी तकनीक का इस्तेमाल करते हुए विकसित किया गया है।

इस अत्याधुनिक ड्रोन बोट की खासियत यह है कि इसमें किसी नाविक की जरूरत नहीं होती और इसे सैटेलाइट या कंट्रोल रूम के जरिए सैकड़ों किलोमीटर दूर से सुरक्षित नियंत्रित किया जा सकता है। यह रडार और अत्याधुनिक सेंसर्स से लैस है जो दुश्मन की हर हरकत को पलक झपकते ही पकड़ने में सक्षम हैं।

भारतीय नौसेना के लिए यह तकनीक एक गेम-चेंजर साबित होने वाली है। इसका इस्तेमाल तटीय सुरक्षा, समुद्री निगरानी, बारूदी सुरंगों का पता लगाने और खुफिया टोही मिशन में किया जाएगा। इससे खतरनाक युद्धक अभियानों में इंसानी जान का जोखिम लगभग खत्म हो जाएगा।
