"सात समंदर पार... अंतरराष्ट्रीय मंच पर हिमाचल का गौरव! दक्षिण अफ्रीका के केपटाउन में दुनिया भर के दिग्गज जुटे हैं... और इस वैश्विक महामंथन में भारत और हिमाचल की आवाज बुलंद कर रहे हैं विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया। 69वें राष्ट्रमंडल संसदीय सम्मेलन के मंच से दुनिया को क्या संदेश दे रहा है हिमाचल? आइए देखते हैं इस खास खबर में..."
शिमला/केपटाउन: (HD News); हिमाचल प्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया दक्षिण अफ्रीका की विधायी राजधानी केपटाउन में आयोजित हो रहे 69वें राष्ट्रमंडल संसदीय सम्मेलन में शामिल हुए हैं। विश्व भर के संसदीय प्रतिनिधियों की उपस्थिति वाला यह प्रतिष्ठित वैश्विक सम्मेलन 13 सितंबर से 17 सितंबर 2026 तक आयोजित किया जा रहा है। सम्मेलन के औपचारिक शुभारंभ से पहले, श्री पठानिया ने दक्षिण अफ्रीका की संसद के प्रांगण में दुनिया भर से आए विदेशी प्रतिनिधियों और भारत के विभिन्न राज्यों के पीठासीन अधिकारियों के साथ एक सामूहिक चित्र में भी हिस्सा लिया।

इस वर्ष के सम्मेलन का मुख्य विषय 'बदलती विश्व व्यवस्था में अंतरराष्ट्रीय कानून और संसदीय लोकतंत्र को मजबूत करना: राष्ट्रमंडल नेतृत्व' रखा गया है। इस विषय की गहराई तक जाने के लिए विभिन्न कार्यशालाओं का आयोजन किया गया है, जिनमें कुल छह प्रमुख विषयों पर मंथन किया जाएगा। इन चर्चाओं में समावेशी व निष्पक्ष व्यापार के लिए अंतर-संसदीय बातचीत को बढ़ावा देने, असमानता व पिछड़ेपन को दूर करने, दिव्यांग लोगों के लिए संसद के समावेशन और जलवायु अनुकूलन जैसे मुद्दों पर विचार किया जाएगा। इसके अतिरिक्त, संसद में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का उपयोग, मानवाधिकारों की रक्षा और शांति को बढ़ावा देने में संसद की भूमिका पर भी विस्तार से चर्चा होगी।
इस सम्मेलन के दौरान विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया 16 सितंबर को एक महत्वपूर्ण सत्र को संबोधित करेंगे। वह 'कानून बनने के बाद समीक्षा: संसद को जनता से जोड़ना' विषय पर अफ्रीकी संसद में बतौर मुख्य वक्ता अपना उद्बोधन देंगे। इस विशेष कार्यशाला में उनके साथ उत्तर प्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष सतीश महाना और हरियाणा विधानसभा के अध्यक्ष हरविंद्र कल्याण भी प्रमुख वक्ता के रूप में मौजूद रहेंगे और वैश्विक पटल पर अपने विचार साझा करेंगे।

सम्मेलन में भाग लेने से पूर्व, श्री पठानिया ने भारत और दक्षिण अफ्रीका के ऐतिहासिक और मजबूत होते द्विपक्षीय संबंधों पर भी विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के संबंध महज कूटनीतिक नहीं हैं, बल्कि ये महात्मा गांधी के सत्याग्रह और भारत रत्न नेल्सन मंडेला के रंगभेद-विरोधी संघर्ष के साझा लोकतांत्रिक मूल्यों से गहराई से जुड़े हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि वर्तमान में दोनों देश ब्रिक्स (BRICS), जी-20 (G20), रक्षा, विज्ञान, स्वास्थ्य और पर्यावरण जैसे अहम क्षेत्रों में व्यापक सहयोग कर रहे हैं। लगभग 18 अरब अमेरिकी डॉलर का वार्षिक व्यापार और दक्षिण अफ्रीका में करीब 17 लाख भारतीय मूल के लोगों की उपस्थिति इस रणनीतिक साझेदारी को 21वीं सदी में एक विशेष और मजबूत आधार प्रदान करती है।
