हाल ही में 25 अक्टूबर 2026 को पूरे देश में शरद पूर्णिमा का पर्व गहरी धार्मिक आस्था और पारंपरिक उल्लास के साथ मनाया गया। हिंदू धर्म के साथ-साथ आयुर्वेद में भी इस दिन का विशेष महत्व है, क्योंकि माना जाता है कि इस रात चंद्रमा अपनी 16 कलाओं से परिपूर्ण होता है और उसकी किरणों से अमृत बरसता है। इसी मान्यता के चलते रात भर छतों पर खीर रखकर उसे प्रसाद के रूप में ग्रहण करने की प्राचीन परंपरा का निर्वहन किया गया।

देश के प्रमुख तीर्थ स्थलों, विशेषकर मथुरा और वृंदावन में बांके बिहारी मंदिर सहित अन्य कृष्ण मंदिरों में भारी भीड़ उमड़ी। यहां भगवान को श्वेत वस्त्र धारण कराए गए और विशेष 'चंद्र कला' दर्शन का आयोजन हुआ। देश के पूर्वी और अन्य कई हिस्सों में इसे कोजागरी पूर्णिमा के रूप में भी मनाया गया, जहां परिवारों ने रात भर जागकर सुख, शांति और समृद्धि के लिए माता लक्ष्मी की विशेष पूजा-अर्चना की।
