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धार्मिक स्थान

7 अक्टूबर से शुरू हो रही शारदीय नवरात्रि, जानें- कलश स्थापना का मुहूर्त, पूजा विधि और सभी जरूरी बातें, पढ़े विस्तार से..

October 06, 2021 07:32 PM

7 अक्टूबर से शुरू हो रही शारदीय नवरात्रि, जानें- कलश स्थापना का मुहूर्त, पूजा विधि और सभी जरूरी बातें, पढ़े विस्तार से..

शिमला : शारदीय नवरात्रि यानि देवी मां की उपासना का महापर्व, हिंदू धर्म में इस पर्व को विशेष महत्व दिया गया है। अश्विन मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि 7 अक्टूबर 2021 दिन गुरुवार से शारदीय नवरात्रि शुरू हो रहे हैं। इस साल दो तिथियां एक साथ पड़ने की वजह से नवरात्रि आठ दिन के हैं। दुर्गा मां का ये पवित्र पर्व 14 अक्टूबर को महानवमी को समाप्त होगा।

कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त : शारदीय नवरात्रि (Shardiya Navratri) की शुरुआत पहले दिन मां शैलपुत्री के पूजन के साथ होती है। इससे पूर्व विधि विधान के साथ कलश स्थापना की जाएगी। नवरात्रि में कलश स्थापना का विशेष महत्व होता है। ज्योतिषाचार्य के अनुसार कलश स्थापना के लिए शुभ मुहूर्त सुबह 6 बजकर 17 मिनट से 7 बजकर 7 मिनट तक है। इस शुभ मुहूर्त में ही कलश स्थापित करना फलदायी रहेगा।

कलश स्थापना की सामग्री : कलश स्थापना के लिए आवश्यक सामिग्री को पहले से ही एकत्र कर लें। इसके लिए आपको 7 तरह के अनाज, चौड़े मुंह वाला मिट्टी का एक बर्तन, पवित्र स्थान से लायी गयी मिट्टी, कलश, गंगाजल, आम या अशोक के पत्ते, सुपारी, जटा वाला नारियल, लाल सूत्र, मौली, इलाइची, लौंग, कपूर, रोली, अक्षत, लाल वस्त्र और पुष्प की जरूरत पड़ती है।

ऐसे करनी है कलश स्थापना : सुबह स्नान करके मां दुर्गा, भगवान गणेश, नवग्रह कुबेरादि की मूर्ति के साथ कलश स्थापन करें। कलश के ऊपर रोली से ॐ और स्वास्तिक लिखें। कलश स्थापना के समय अपने पूजा गृह में पूर्व के कोण की तरफ अथवा घर के आंगन से पूर्वोत्तर भाग में पृथ्वी पर सात प्रकार के अनाज रखें। संभव हो, तो नदी की रेत रखें। फिर जौ भी डालें। इसके उपरांत कलश में गंगाजल, लौंग, इलायची, पान, सुपारी, रोली, कलावा, चंदन, अक्षत, हल्दी, रुपया, पुष्पादि डालें। फिर 'ॐ भूम्यै नमः' कहते हुए कलश को सात अनाजों सहित रेत के ऊपर स्थापित करें। अब कलश में थोड़ा और जल या गंगाजल डालते हुए 'ॐ वरुणाय नमः' कहें और जल से भर दें। इसके बाद आम का पल्लव कलश के ऊपर रखें। तत्पश्चात् जौ अथवा कच्चा चावल कटोरे में भरकर कलश के ऊपर रखें। अब उसके ऊपर चुन्नी से लिपटा हुआ नारियल रखें।

फिर लें संकल्प : हाथ में हल्दी, अक्षत पुष्प लेकर इच्छित संकल्प लें. इसके बाद 'ॐ दीपो ज्योतिः परब्रह्म दीपो ज्योतिर्र जनार्दनः! दीपो हरतु मे पापं पूजा दीप नमोस्तु ते. मंत्र का जाप करते दीप पूजन करें. कलश पूजन के बाद नवार्ण मंत्र 'ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुंडायै विच्चे!' से सभी पूजन सामग्री अर्पण करते हुए मां शैलपुत्री की पूजा करें.

ये दो तिथियां एक साथ :  09 अक्टूबर, शनिवार को तृतीया तिथि सुबह 07 बजकर 48 मिनट तक ही रहेगी। इसके बाद चतुर्थी तिथि लग जाएगी, जो कि अगले दिन 10 अक्टूबर (शनिवार) को सुबह 05 बजे तक रहेगी। इस साल दो तिथियां एक साथ लगने के कारण नवरात्रि आठ दिन के पड़ेंगे।

तिथि के अनुसार, मां दुर्गा के इन रूपों की करें पूजा

पहला दिन (7 अक्टूबर)- मां शैलपुत्री की आराधना

दूसरा दिन (8 अक्टूबर)- मां ब्रह्मचारिणी की आराधना

तीसरा दिन (9 अक्टूबर)- मां चंद्रघंटा और मां कुष्मांडा की पूजा

चौथा दिन (10 अक्टूबर)- मां स्कंदमाता की आराधना

पांचवा दिन (11 अक्टूबर) मां कात्यायनी की आराधना

छठा दिन (12 अक्टूबर) मां कालरात्रि की आराधना

सातवां दिन (13 अक्टूबर)- मां महागौरी की पूजा

आठवां दिन (14 अक्टूबर)- मां सिद्धिरात्रि की पूजा

नौवां दिन (15 अक्टूबर)- दशहरा

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