विश्व विख्यात शक्तिपीठ श्री नयना देवी जी में पेयजल व्यवस्था पूरी तरह पटरी से उतर चुकी है। विभाग की कार्यप्रणाली पर सबसे बड़ा प्रहार यह है कि पिछले 25 दिनों के भीतर 10 दिन यहाँ की जनता को बूंद-बूंद पानी के लिए तरसाया गया है। बार-बार लगने वाले इस 'वॉटर ब्रेक' और विभाग के रटे-रटाए बहानों ने स्थानीय निवासियों के सब्र का बांध तोड़ दिया है। भारी-भरकम बिलों के बावजूद मूलभूत सुविधा से वंचित यहाँ के बाशिंदे अब सरकार से सीधी जवाबदेही की मांग कर रहे हैं कि आखिर इस अव्यवस्था का जिम्मेदार कौन है? पढ़ें पूरी खबर..
नयना देवी : (HD News); प्रसिद्ध धार्मिक नगरी श्री नयना देवी जी में पेयजल संकट ने विकराल रूप धारण कर लिया है। यहाँ के बाशिंदे विभाग की लचर व्यवस्था के कारण बूंद-बूंद पानी को तरस रहे हैं। पिछले दो दिनों से शहर में पानी की एक बूंद भी मयस्सर नहीं हो पाई है, जिससे स्थानीय निवासियों और व्यापारियों का जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है। हैरानी की बात यह है कि विभाग इस गंभीर समस्या का स्थायी समाधान निकालने में पूरी तरह नाकाम साबित हो रहा है।

आंकड़ों में लापरवाही: 25 दिनों में 10 दिन रही 'तालाबंदी'
जल शक्ति विभाग की कार्यप्रणाली पर सबसे बड़ा सवालिया निशान यह है कि पिछले महज 25 दिनों के भीतर करीब 10 दिनों तक पानी की सप्लाई पूरी तरह बाधित रही है। हाल ही में 13 तारीख को चार दिनों के लिए पानी की सप्लाई ठप हुई थी, जबकि इससे पूर्व नव वर्ष मेले से पहले भी चार दिनों तक भारी किल्लत रही थी। थोड़े-थोड़े अंतराल के बाद बार-बार पैदा हो रहा यह संकट अब जनता के सब्र का बांध तोड़ रहा है। नगर परिषद के साथ-साथ आसपास की आधा दर्जन पंचायतों में भी हाहाकार मचा हुआ है।
वैकल्पिक स्रोतों का अभाव और भौगोलिक मजबूरी
स्थानीय निवासी अल केंद्र भूषण, अमित शर्मा, राजेश कुमार, गौरव शर्मा, भारत भूषण शर्मा और श्रीकांत ने गहरा रोष व्यक्त करते हुए कहा कि श्री नयना देवी जी एक ऊंची पहाड़ी पर स्थित है, जहाँ पानी का कोई अन्य प्राकृतिक स्रोत उपलब्ध नहीं है। यहाँ की पूरी आबादी और आने वाले श्रद्धालु पूरी तरह विभाग की पेयजल योजना पर निर्भर हैं। लोगों का कहना है कि घरों में इतनी स्टोरेज क्षमता नहीं होती कि चार-चार दिनों तक पानी बचाकर रखा जा सके, जिससे रोजमर्रा के कार्य प्रभावित हो रहे हैं।

महंगे बिलों पर भड़की जनता: जवाबदेही की मांग
ग्रामीणों ने विभाग और सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए पूछा है कि जब सेवा देने में विभाग फिसड्डी है, तो भारी-भरकम बिल क्यों वसूले जा रहे हैं? लोगों का कहना है कि विभाग हर बार 'पंप खराब होना', 'पाइप फटना' या 'ट्रांसफार्मर में खराबी' जैसे घिसे-पिटे बहाने बनाकर पल्ला झाड़ लेता है। सर्दियों के मौसम में यदि यह हाल है, तो गर्मियों में स्थिति कितनी भयावह होगी, इसका अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है। जनता ने अब स्पष्ट रूप से सरकार से जवाबदेही सुनिश्चित करने की मांग की है।
विभागीय पक्ष: जल्द बहाली का आश्वासन
पेयजल व्यवस्था में बार-बार आ रहे व्यवधान के संबंध में जब जल शक्ति विभाग (बस्सी) के सहायक अभियंता सुरेश पुरी से बात की गई, तो उन्होंने बताया कि दवट स्थित पंप में अचानक तकनीकी खराबी आने के कारण यह समस्या उत्पन्न हुई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि विभाग की टीम मरम्मत कार्य में जुटी है। उनके अनुसार, आज शाम तक पंप को ठीक कर लिया जाएगा और कल (गुरुवार) तक प्रभावित क्षेत्रों में पानी की सप्लाई बहाल कर दी जाएगी।
धार्मिक और पर्यटन की दृष्टि से अति-महत्वपूर्ण होने के बावजूद श्री नयना देवी जी में इस तरह का बार-बार उत्पन्न होने वाला पेयजल संकट विभाग की साख पर प्रश्नचिह्न लगा रहा है। अब देखना यह होगा कि क्या प्रशासन इस समस्या का कोई स्थायी समाधान निकालता है या भविष्य में भी जनता को इसी तरह किल्लत का सामना करना पड़ेगा।
