पवित्र कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि और सोमवार के विशेष संयोग पर आज, 2 नवंबर की प्रातः से ही देश के प्रमुख धार्मिक स्थलों पर आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है। ब्रह्म मुहूर्त (प्रातः 4:50 से 5:42 बजे) के साथ ही वाराणसी के काशी विश्वनाथ, उज्जैन के महाकालेश्वर और हरिद्वार की हर की पौड़ी पर हजारों की संख्या में श्रद्धालु पवित्र स्नान और जलाभिषेक के लिए एकत्रित हुए। मंदिरों में सुबह की मंगला आरती के दौरान शंखनाद और हर-हर महादेव के जयकारों से पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा।
ज्योतिषीय और पंचांग गणनाओं के अनुसार, आज दोपहर 1 बजकर 10 मिनट तक अष्टमी तिथि रहेगी और इसके पश्चात नवमी तिथि का प्रवेश होगा। आज चंद्रमा अपनी ही राशि कर्क में और अश्लेषा नक्षत्र में गोचर कर रहे हैं, जबकि दोपहर 12 बजकर 6 मिनट तक 'शुभ' योग और उसके बाद 'शुक्ल' योग का निर्माण हो रहा है। कार्तिक मास में सोमवार के दिन इस प्रकार के ग्रह संयोग में भगवान शिव का रुद्राभिषेक और दीपदान करना अत्यंत पुण्यदायी और कष्टनिवारक माना गया है।
अष्टमी और सोमवार के इस पावन अवसर पर आज प्रातःकाल से ही मंदिरों में विशेष अनुष्ठान, रुद्राभिषेक और महामृत्युंजय मंत्र के जाप किए जा रहे हैं। कार्तिक स्नान करने वाले व्रती श्रद्धालुओं ने सूर्योदय (प्रातः 6:33 बजे) के साथ ही सूर्य देव को अर्घ्य देकर तुलसी और आंवले के वृक्ष की विधिवत पूजा-अर्चना की। पंचांग के अनुसार आज सुबह 7:56 से 9:19 बजे तक राहुकाल रहेगा, जिसे ध्यान में रखते हुए अधिकांश भक्तों ने प्रातःकालीन अमृत चौघड़िया और शुभ मुहूर्त में ही अपने संकल्प और पूजन कार्य संपन्न कर लिए हैं।
श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए देश के प्रमुख मंदिरों के ट्रस्ट और स्थानीय प्रशासन द्वारा सुरक्षा एवं सुगम दर्शन के कड़े इंतजाम किए गए हैं। मंदिर परिसरों में बैरिकेडिंग के साथ-साथ बुजुर्गों और दिव्यांगजनों के लिए विशेष कतारों की व्यवस्था की गई है ताकि किसी भी भक्त को दर्शन में असुविधा न हो। धर्माचार्यों ने आज के दिन अन्न, गर्म वस्त्र और तिल का दान करने का विशेष महत्व बताया है, जिसके चलते मंदिरों के बाहर सुबह से ही सेवा और दान-पुण्य का दौर जारी है।