शीतकाल के लिए कपाट बंद होने से पूर्व केदारनाथ व चारधाम में अंतिम चरण की यात्रा तेज, प्रातःकाल से ही दर्शन के लिए लगी लंबी कतारें
उत्तराखंड के उच्च हिमालयी क्षेत्र में स्थित विश्व प्रसिद्ध श्री केदारनाथ धाम और गंगोत्री-यमुनोत्री सहित चारों धामों के कपाट शीतकाल के लिए बंद होने में अब मात्र कुछ ही दिनों का समय शेष रह गया है। आगामी दीपावली और भाई दूज (11 नवंबर) के पावन पर्व के आसपास कपाट बंद होने की परंपरा के चलते, आज प्रातः से ही केदारपुरी और बद्रीनाथ धाम में अंतिम चरण के दर्शनों के लिए भक्तों का भारी सैलाब उमड़ पड़ा है। कड़ाके की ठंड और शून्य से नीचे जाते तापमान के बावजूद श्रद्धालुओं की आस्था में कोई कमी नहीं दिख रही है।
आज सुबह तड़के 4 बजे से ही केदारनाथ मंदिर परिसर के बाहर भक्तों की लंबी कतारें लग गईं, जहां श्रद्धालुओं ने बाबा केदार के प्रातःकालीन श्रृंगार और अभिषेक पूजन के दर्शन कर पुण्य लाभ कमाया। बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (BKTC) ने शीतकालीन कपाट बंदी और पंचमुखी उत्सव डोली के शीतकालीन गद्दीस्थल ऊखीमठ (ओंकारेश्वर मंदिर) प्रस्थान की प्रशासनिक व धार्मिक तैयारियां भी तेज कर दी हैं। पुजारियों और वेदपाठियों द्वारा प्रतिदिन विशेष वैदिक मंत्रोच्चार के साथ भगवान की विशेष पूजा संपन्न कराई जा रही है।
नवंबर माह की शुरुआत के साथ ही केदारघाटी और बद्रीशपुरी की ऊंची चोटियों पर बर्फबारी और तेज शीतलहर का प्रकोप बढ़ गया है, जिसे देखते हुए यात्रा प्रशासन ने आज सुबह नई स्वास्थ्य और सुरक्षा एडवाइजरी जारी की है। गौरीकुंड और सोनप्रयाग से आज प्रातः पहले जत्थे को पूरी जांच और पंजीकरण के सत्यापन के बाद ही पैदल मार्ग पर आगे रवाना किया गया। यात्रा मार्ग पर जगह-जगह अलाव, गर्म पानी और प्राथमिक चिकित्सा केंद्रों को चौबीसों घंटे सक्रिय रहने के निर्देश दिए गए हैं।
मंदिर समिति के अधिकारियों के अनुसार, कपाट बंद होने से पहले के इन अंतिम 8-9 दिनों में देश के कोने-कोने से यात्री भगवान के दर्शन कर आशीर्वाद लेना चाहते हैं। प्रशासन ने बुजुर्ग यात्रियों और छोटे बच्चों के साथ आ रहे परिवारों से अपील की है कि वे मौसम के पूर्वानुमान को देखकर ही अपनी यात्रा आगे बढ़ाएं और पर्याप्त गर्म कपड़े साथ रखें। भक्तों के जयकारों और ढोल-दमाऊं की पारंपरिक थाप के बीच हिमालयी धामों में इस समय अत्यंत अलौकिक और आध्यात्मिक माहौल बना हुआ है।