हिमाचल प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र के पहले चरण का आज तीसरा दिन सियासी तपिश भरा रहा। सदन की कार्यवाही शुरू होते ही जहां विपक्ष ने 'विधायक निधि' रोके जाने पर सरकार को घेरा, वहीं प्रश्नकाल में एक अलग ही नजारा देखने को मिला जब कांग्रेस विधायक कुलदीप राठौर बागवानों के हक में अपनी ही सरकार पर बरस पड़े। उन्होंने आढ़तियों द्वारा बागवानों के पैसे लेकर भागने और कार्रवाई में 'लिपापोती' करने का गंभीर आरोप लगाया। हालांकि, हंगामे के बीच मुख्यमंत्री ने विधायक निधि पर नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर के साथ बैठकर चर्चा करने का प्रस्ताव देकर गतिरोध तोड़ने की पहल की है। पढ़ें विस्तार से..
शिमला (18 फरवरी 2026): हिमाचल प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र के पहले चरण का आज तीसरा और संभवतः आखिरी दिन हंगामेदार रहा। सुबह 11 बजे प्रश्नकाल के साथ जैसे ही कार्यवाही शुरू हुई, सदन का माहौल गरमा गया। एक तरफ जहां विपक्ष ने 'विधायक निधि' रोके जाने पर सरकार को घेरा, वहीं दूसरी तरफ सत्ता पक्ष के विधायक ने ही बागवानों के साथ हो रही ठगी पर अपनी सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए। पक्ष-विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक ने आज के सत्र को सियासी तपिश से भर दिया।

विधायक निधि पर आर-पार: CM ने बढ़ाया सुलह का हाथ
सदन की कार्यवाही शुरू होते ही विधायक क्षेत्र विकास निधि (MLA Fund) रोके जाने का मुद्दा गूंजा। विपक्ष ने इस मुद्दे पर आक्रामक रुख अपनाते हुए नारेबाजी शुरू कर दी, जिसके जवाब में सत्ता पक्ष भी आमने-सामने आ गया। भारी शोरगुल के बीच मुख्यमंत्री ने हस्तक्षेप करते हुए सुलह का रास्ता सुझाया। सीएम ने कहा कि वे नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर के साथ बैठकर आरडीजी (RDG) पर चर्चा करेंगे और यह तय किया जाएगा कि वर्तमान वित्तीय स्थिति में कितनी विधायक निधि जारी की जा सकती है। मुख्यमंत्री के इस बयान को गतिरोध तोड़ने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
अपनी ही सरकार पर बरसे कुलदीप राठौर: 'लिपापोती' का लगाया आरोप
प्रश्नकाल के दौरान एक दिलचस्प वाकया तब देखने को मिला जब कांग्रेस विधायक कुलदीप सिंह राठौर ने बागवानों के मुद्दे पर अपनी ही सरकार को कटघरे में खड़ा कर दिया। उन्होंने शिलारू मंडी में हुए करीब 5 करोड़ रुपये के घोटाले का जिक्र करते हुए कहा कि आढ़ती हर साल छोटे बागवानों का पैसा लेकर भाग रहे हैं और सरकार का जवाब बहुत ही 'वेग' (अस्पष्ट) है। राठौर ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि कार्रवाई के नाम पर सिर्फ 'लिपापोती' हो रही है, जो चिंता का विषय है। उन्होंने मांग की कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो, इसके लिए ठोस कदम उठाए जाएं।

कृषि मंत्री का कबूलनामा: कानून सख्त करने की तैयारी
विधायक के तीखे सवालों का जवाब देते हुए कृषि मंत्री चंद्र कुमार ने सदन में माना कि समस्या गंभीर है। उन्होंने स्वीकार किया कि अभी तक सिर्फ 12 शिकायतों का ही निपटारा हो पाया है और लंबित मामलों में 2 करोड़ रुपये से अधिक की वसूली बाकी है। मंत्री ने आश्वासन दिया कि सरकार आढ़तियों पर नकेल कसने के लिए नियमों में बदलाव कर रही है। उन्होंने कहा कि अब आढ़तियों की सिक्योरिटी राशि (Security Deposit) को बढ़ाया जाएगा और उनसे एक निश्चित प्रतिशत राशि पहले जमा करवाई जाएगी, ताकि वे बागवानों का पैसा लेकर भाग न सकें।
सत्र का भविष्य: क्या बढ़ेगी अवधि?
16 फरवरी को राज्यपाल के अभिभाषण से शुरू हुए बजट सत्र के पहले चरण का आज आखिरी दिन निर्धारित है। हालांकि, सदन के भीतर बन रही सहमति और विधायी कार्यों को देखते हुए इस बात के संकेत मिले हैं कि यदि पक्ष और विपक्ष में सहमति बनती है, तो सत्र की अवधि कुछ और दिनों के लिए बढ़ाई जा सकती है।
बहरहाल, विधानसभा में प्रश्नकाल की गहमागहमी के बाद अब सदन का फोकस आरडीजी (RDG) पर चल रही महत्वपूर्ण चर्चा पर है। लेकिन इन विधायी कार्यों के बीच सबसे बड़ा सस्पेंस सत्र की अवधि को लेकर बना हुआ है। क्या बजट सत्र का यह चरण आज थम जाएगा या जनहित के मुद्दों और बाकी बचे विधायी कार्यों को देखते हुए इस पर कोई 'ब्रेक' नहीं लगेगा? इस असमंजस से पर्दा आज शाम 5 बजे तक सदन की कार्यवाही के समापन के साथ ही उठ पाएगा। तब तक पूरे प्रदेश की निगाहें शिमला स्थित विधानसभा पर टिकी हैं कि पक्ष और विपक्ष मिलकर सत्र को लेकर क्या निर्णायक फैसला लेते हैं।
