उत्तराखंड के विश्व प्रसिद्ध चारधाम—केदारनाथ, बदरीनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री में शीतकालीन कपाट बंदी की तिथियां नजदीक आने के साथ ही यात्रा अब अपने अंतिम चरण में पहुंच गई है। नवंबर माह की शुरुआत और आगामी दीपावली व भैयादूज पर्व के आसपास परंपरागत रूप से गंगोत्री, यमुनोत्री और केदारनाथ धाम के कपाट शीतकाल के लिए बंद कर दिए जाते हैं। इसे देखते हुए कपाट बंद होने से पहले बाबा केदार और बदरी विशाल के दर्शन करने के लिए देश-विदेश से श्रद्धालुओं का भारी जत्था हिमालयी धामों में पहुंच रहा है।
उच्च हिमालयी क्षेत्रों में सुबह और शाम के समय तापमान में भारी गिरावट आने के बावजूद भक्तों के उत्साह में कोई कमी नहीं देखी जा रही है। मंदिर समितियों द्वारा शीतकालीन प्रवास और डोली यात्रा की तैयारियां तेज कर दी गई हैं। परंपरा के अनुसार, कपाट बंद होने के बाद अगले छह महीनों तक इन धामों के चल विग्रहों (उत्सव डोलियों) की पूजा उनके शीतकालीन गद्दीस्थलों—मुखबा, खरसाली, ऊखीमठ और पांडुकेश्वर में की जाती है, जहां श्रद्धालु शीतकाल के दौरान दर्शन कर सकते हैं।
हिमाचल प्रदेश के प्रमुख शक्तिपीठों—चिंतपूर्णी, ज्वालाजी, नैना देवी, चामुंडा देवी और बज्रेश्वरी धाम में भी कार्तिक मास और रविवार के चलते आज सुबह से ही श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगी हुई हैं। मंदिर प्रशासन की ओर से बुजुर्गों और दूर-दराज से आने वाले यात्रियों की सुविधा के लिए सुगम दर्शन, पेयजल और लंगर की व्यवस्थाओं को दुरुस्त रखा गया है। धार्मिक पर्यटन से जुड़े क्षेत्रों में दीपावली के उत्सव से पहले इस सप्ताहांत पर खासी चहल-पहल बनी हुई है।